मानवी का मुंडन

मानवी का भी मुंडन आख़िर २९ अप्रिल २००८ को हो ही गया | हम सभी प्रातः ८ बजे तक हरिद्वार पहुचं गए | गंगाजी के दर्शन और वहां की सुन्दरता को देख कर मन बहुत ही प्रसन्न हुआ | इससे पहले मैं हरिद्वार करीब २५ साल पहले पापा-मम्मी और रिंकू के साथ आया था | घाट पर कदम रखते ही मुझे २५ सालों पुराना द्रश्य याद आ गया जब रिंकू पापा और मम्मी को गंगाजी की ओर स्नान करने जाता देख रोने लगा था |

आज मैं मानवी का मुंडन करा रहा हूँ | एक साल से भी छोटे बच्चे को गंगाजी के घाट पर लेजाकर उसे कसकर पकड़कर उसके बाल मुंडवाना मुझे तो एक पाप के समान लगा | मानवी बहुत रो रही थी और मुझे ऐसा लग रहा था की वो मुझे कभी माफ़ नही करगी | परन्तू मानवी एक बहुत अच्छी बच्ची है और मुंडन के तुरंत बाद एकदम चुप हो गयी | आप भी मुंडन से पहले और मुंडन के बाद की मानवी की तस्वीर का आनंद लें और मुझे अवश्य बताए की भारतीय समाज में मुंडन की प्रथा का प्रचलन कब और कहाँ हुआ |

Manvi Before Mundan

Manvi Afer Mundan

मानव

One Response to “मानवी का मुंडन”

  1. Monika says:

    so cuteeeeeeeeee baby…..and father too..:D

Leave a Reply